वन्देमातरम जय हिन्द

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रविवार, 8 जनवरी 2012

एअर कंडीशन नेता




वंदन कर भारत माता का, गणतंत्र राज्य की बोलो जय ।
काका का दर्शन प्राप्त करो, सब पाप-ताप हो जाए क्षय ॥
मैं अपनी त्याग-तपस्या से जनगण को मार्ग दिखाता हूँ ।
है कमी अन्न की इसीलिए चमचम-रसगुल्ले खाता हूँ ॥
गीता से ज्ञान मिला मुझको, मँज गया आत्मा का दर्पण ।
निर्लिप्त और निष्कामी हूँ, सब कर्म किए प्रभु के अर्पण ॥
आत्मोन्नति के अनुभूत योग, कुछ तुमको आज बतऊँगा ।
हूँ सत्य-अहिंसा का स्वरूप, जग में प्रकाश फैलाऊँगा ॥
आई स्वराज की बेला तब, 'सेवा-व्रत' हमने धार लिया ।
दुश्मन भी कहने लगे दोस्त! मैदान आपने मार लिया ॥
जब अंतःकरण हुआ जाग्रत, उसने हमको यों समझाया ।
आँधी के आम झाड़ मूरख क्षणभंगुर है नश्वर काया ॥
गृहणी ने भृकुटी तान कहा-कुछ अपना भी उद्धार करो ।
है सदाचार क अर्थ यही तुम सदा एक के चार करो ॥
गुरु भ्रष्टदेव ने सदाचार का गूढ़ भेद यह बतलाया ।
जो मूल शब्द था सदाचोर, वह सदाचार अब कहलाया ॥
गुरुमंत्र मिला आई अक्कल उपदेश देश को देता मैं ।
है सारी जनता थर्ड क्लास, एअरकंडीशन नेता मैं ॥
जनता के संकट दूर करूँ, इच्छा होती, मन भी चलता ।
पर भ्रमण और उद्घाटन-भाषण से अवकाश नहीं मिलता ॥
आटा महँगा, भाटे महँगे, महँगाई से मत घबराओ ।
राशन से पेट न भर पाओ, तो गाजर शकरकन्द खाओ ॥
ऋषियों की वाणी याद करो, उन तथ्यों पर विश्वास करो ।
यदि आत्मशुद्धि करना चाहो, उपवास करो, उपवास करो ॥
दर्शन-वेदांत बताते हैं, यह जीवन-जगत अनित्या है ।
इसलिए दूध, घी, तेल, चून, चीनी, चावल, सब मिथ्या है ॥
रिश्वत अथवा उपहार-भेंट मैं नहीं किसी से लेता हूँ ।
यदि भूले भटके ले भी लूँ तो कृष्णार्पण कर देता हूँ ॥
ले भाँति-भाँति की औषधियाँ, शासक-नेता आगे आए ।
भारत से भ्रष्टाचार अभी तक दूर नहीं वे कर पाए ॥
अब केवल एक इलाज शेष, मेरा यह नुस्खा नोट करो ।
जब खोट करो, मत ओट करो, सब कुछ डंके की चोट करो ॥

यह रचना काका हाथरसी की है और आज के समय में भी प्रासंगिक है . आप भी कविता पढ़िए और आनंद उठाइये.

27 टिप्‍पणियां:

mahendra verma ने कहा…

काका की यह रचना तो ऐसा लगता है जैसे आजकल के लिए ही लिखी गई है।
क्या जबर्दस्त व्यंग्य है !
इसे प्रस्तुत करने के लिए आभार आपका।

Bharat Bhushan ने कहा…

काका हाथरसी कमाल के हैं. उनकी तब की लिखी आज भी सच है. आपको धन्यवाद इसे यहाँ पुनर्प्रस्तुत करने के लिए.

Bharat Bhushan ने कहा…

उनकी भ्रष्टाचार पर लिखी पंक्तियाँ याद आईं जो कुछ इस प्रकार थीं-
क्या हुआ जो पकड़े गए हो रिश्वत लेकर
कह काका फिर छूट जाओ तुम रिश्वत दे कर

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

भारत से भ्रष्टाचार अभी तक दूर नहीं वे कर पाए ॥
अब केवल एक इलाज शेष, मेरा यह नुस्खा नोट करो ।
जब खोट करो, मत ओट करो, सब कुछ डंके की चोट करो ॥
सच्चाई व्यक्त करते बहुत ही सुन्दर

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

'एक ब्लॉग सबका' ब्लॉग पर भी इस पोस्ट को प्रकाशित करें .आभार
http://apnaauraapkablog.blogspot.com/

Rakesh Kumar ने कहा…

जो मूल शब्द था सदाचोर, वह सदाचार अब कहलाया ॥

काका जी भी बस काका जी ही थे.

सुन्दर व्यंग्यपूर्ण प्रस्तुति पढवाने के लिए आभार,रेखा जी.

Atul Shrivastava ने कहा…

मौजूदा दौर की परिस्थितियों पर सटीक उतरती रचना।
इसे साझा करने के लिए आभार.......

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

सचमुच कमाल है....
काका की बेहतरीन रचना पढवाने के लिए सादर आभार...

Rajput ने कहा…

रिश्वत अथवा उपहार-भेंट मैं नहीं किसी से लेता हूँ ।
यदि भूले भटके ले भी लूँ तो कृष्णार्पण कर देता हूँ

बिलकुल हालात के अनुरूप लिखी गई रचना
बहुत सुन्दर

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

वाह. डंके की चोट पर कविता.

मनोज कुमार ने कहा…

काका की सारी रचनाएं मुझे बहुत प्रिय हैं। आभार इस प्रस्तुति के लिए।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

काका का जवाब नहीं!

कुमार राधारमण ने कहा…

समर्थकों की बढ़ती फौज देख काका की आत्मा तृप्त हो रही होगी!

sm ने कहा…

गुरुमंत्र मिला आई अक्कल उपदेश देश को देता मैं ।
है सारी जनता थर्ड क्लास, एअरकंडीशन नेता मैं ॥
excellent

Maheshwari kaneri ने कहा…

जबर्दस्त व्यंग्य है !बहुत सटीक...very Happy uttarayan (makar sankranti)

vandana ने कहा…

जबरदस्त व्यंग्य ...धन्यवाद शेयर करने के लिये

Rohitas ghorela ने कहा…

काका का इलाज बहुत सटीक हैं...



अब केवल एक इलाज शेष, मेरा यह नुस्खा नोट करो ।

जब खोट करो, मत ओट करो, सब कुछ डंके की चोट करो ॥

हर एक दोहा शानदार हैं 'काका' के
मैं आपको मेरे ब्लॉग पर सादर आमन्त्रित करता हूँ.....

NEELKAMAL VAISHNAW ने कहा…

तीखा प्रहार
जय हो काका हाथरसी की

Patali-The-Village ने कहा…

हर एक दोहा शानदार हैं| धन्यवाद|

दिगम्बर नासवा ने कहा…

काका की रचनाएं हमेशा गुदगुदाती हैं ... शुक्रिया इस पेशकश के लिए ...

विजय ने कहा…

bahut hi sundar rachna....karara vyang

सदा ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

अभिषेक मिश्र ने कहा…

"...जब खोट करो, मत ओट करो, सब कुछ डंके की चोट करो ॥"
उपयुक्त सुझाव. रचना का सार्थक चयन किया है आपने.

sm ने कहा…

सब कुछ डंके की चोट करो
जबरदस्त व्यंग्य

Madan Mohan Saxena ने कहा…

वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

Darshan jangra ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

SEO ने कहा…

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